टोपी, टीपू के लिए!

जाली आदमी के लिए जालीदार टोपी

“ख़ादिम-ए-दीन”

यानी “आसमानी शांतिप्रिय मज़हब की सेवा करनेवाला” — और ये ख़िताब शायद Akhilesh Yadav एक-एक बयान देकर ख़ुद कमाने में लगे हैं।

कभी चुनिंदा मुद्दों पर संवेदनशीलता,
कभी समय-समय पर प्रतीकात्मक राजनीति,
और अब सड़कों पर नमाज़ के समर्थन वाला बयान —

मैसेज हर बार वही रहता है:
पहले वोटबैंक, जनता बाद में।

क्योंकि टीपू जी के नए सेकुलरिज़म के मॉडल में सड़कें पब्लिक की कम, आसमानी धर्म का मंच ज़्यादा लगती हैं। जहाँ नियम वोट बैंक के हिसाब से बदल जाते हैं और एक आम हिंदू सिर्फ़ एडजस्ट करता रह जाता है।

इसलिए “टिपू भाईजान,”
हमारी तरफ़ से आपके लिए एक छोटा-सा तोहफ़ा — जालीदार टोपी।

आख़िर जब सड़कों पर धर्म की राजनीति चले,
तो हेलमेट की क्या ज़रूरत?
टोपी ही काफ़ी है।

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